सितम्बर 11, 2017

हमारे बारे में


हमारा दृष्टिकोण

हम विश्व बंधुत्व की भावना से चलते हुए केवल मानव ही नहीं, अपितु संसार के समस्त प्राणियों एवं प्रकृति के प्रति दया, सहयोग तथा परोपकार की धारणा पर विश्वास करते हैं | हम प्रत्येक प्राणी के मुखमंडल पर प्रसन्नता एवं निर्भयता की झलक देखना चाहते हैं तथा इसके लिए सनातन धर्म में बताई गयी प्राचीन जीवनीय सिद्धांतों का पालन करने के लिए प्रतिबद्ध हैं |

हम स्वार्थ एवं अन्याय के हर उस रूप या परम्परा के विरोधी हैं जो धर्म, मानवता या नैसर्गिक प्रकृति के विरुद्ध हो | साथ ही हम यह भी इच्छा रखते हैं कि समस्त मानवजाति को पर्याप्त एवं यथोचित मात्रा में अन्न, जल, वस्त्र, आवास, शिक्षा, चिकित्सा एवं सुरक्षा के साथ साथ ईश्वर की कृपा प्राप्त होती रहे |


 

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हमारी कहानी

यूं तो हमारे सभी सदस्य एवं अधिकारीगण स्वतंत्र रूप से लगभग विगत दो दशकों से निरंतर सक्रिय हैं परन्तु एक संस्था के रूप में हमारा प्रारूपण अक्टूबर, २०१२ में हुआ | बाल्यकाल में ही देशभर में अपने उच्चस्तरीय व्याख्यानों के द्वारा ख्याति प्राप्त कर चुके महामहिम श्रीभागवतानंद गुरु अपने विद्यार्थी जीवन में देश की धार्मिक, राजनैतिक एवं सामाजिक अव्यवस्था से चिंतित थे | उस समय महामहिम ने अपने विद्यालय की दसवीं कक्षा में पढ़ते हुए कुछ सहपाठियों एवं शिष्यों के साथ आर्यावर्त सनातन वाहिनी 'धर्मराज' की स्थापना की थी | धीरे धीरे हमने बहुत से संघर्षों एवं संकटों से भरे दौर देखे जिनसे हमें और भी सुदृढ़ता मिलती गयी |


 

प्रमुख लोगों से मिलें

प्रारंभ में जब हमारी स्थापना हुई तो उसमें दस-बारह लोगों की ही सक्रियता थी | हमने अपनी सदस्यता तेज़ी से बढ़ानी प्रारम्भ कर दी | हमारी योजनाओं से आकृष्ट होकर सैकड़ों हजारों लोगों ने हमारे अभियान में जुड़ने की इच्छा व्यक्त की, परन्तु शीघ्र ही हमें यह ज्ञात हुआ कि वास्तव में लोकोपकार उतना भी सरल नहीं, जितना कि हम समझ रहे थे | हमारे सहयोगियों का एक बड़ा वर्ग संगठन का प्रयोग निजी स्वार्थ की पूर्ति, लोकप्रियता बटोरने तथा धनसंग्रह करने में लगा था जो हमारी मूल धारणा के सर्वथा विपरीत होने के कारण अनुचित था | धीरे धीरे हमें यह भी अनुभूत हुआ कि त्याग, सहिष्णुता एवं दयाभाव के गुणों से युक्त व्यक्ति ही हमारे वास्तविक सहयोगी हो सकते हैं, अतः हमने अपने कलंकित सदस्यों एवं पदाधिकारियों को तत्काल प्रभाव से स्थायी तौर पर निलंबित करके बहुत ही कठोर परीक्षाओं के बाद संगठन का प्रभार योग्य व्यक्तियों के हाथ में सौंपा जो आवश्यकता पड़ने पर अपना सर्वस्व बलिदान करने से भी पीछे नहीं हटते |

हमारा संगठन इस बात पर भी सहमत हुआ कि सम्पूर्ण विश्व में जो भी व्यक्ति सत्य, परोपकार, स्वार्थहीनता, सहिष्णुता एवं धर्मनिष्ठा से युक्त है, प्रकृति एवं सभ्यता का सम्मान करता है, तथा जिसके मन में कोई छल नहीं, वह व्यक्ति हमारा सहयोगी है, चाहे फिर उसकी पहचान हमारे संगठन के साथ आधिकारिक रूप से जुडी हो या नहीं हो | हमने यह भी स्वीकार किया कि सैकड़ों मूर्खों की अपेक्षा एक विद्वान् का निर्णय अधिक प्रभावी एवं दूरगामी होता है अतः हमने भीड़ बटोरने की बजाय चुनिन्दा लोगों को ही संगठन की सदस्यता एवं पदाधिकार सौंपने की रणनीति बनायी | हमने अपने ऊपर आये मतभेद एवं संकटों के बावजूद अपना धैर्य नहीं खोया एवं ईश्वर की कृपा से निरंतर सुदृढ़ होते हुए आज भारत के अठारह से भी अधिक राज्यों में यथासंभव कार्य कर रहे हैं | आज हमें इस बात का गर्व है कि व्यक्ति के धन, बल एवं पद को प्रधानता न देकर उसके व्यक्तिगत नैतिक मूल्यों के आधार पर उसकी महत्ता का आंकलन करने की योजना के फलस्वरूप हमें समाज के बहुत से छिपे हुए अमूल्य व्यक्तित्व मिले |

महामहिम श्रीभागवतानंद गुरु

संस्थापक सह महानिदेशक

[ ख्यातिलब्ध लेखक, धर्मगुरु, समाज सुधारक, राजनीतिज्ञ एवं प्रवाचक हैं ]

अभिजीत दुबे

मुख्य संयोजक एवं  प्रतिनिधि

आचार्यश्री शंकरदास गुरु

रामराज्य  एवं  गोपालन विभाग 

[ ख्यातिलब्ध आध्यात्मिक हस्ती, कवि, कानूनी सलाहकार एवं लोकोपकारी हैं ]

श्री संजय मिश्र

मुख्य प्रवक्ता  एवं कर्मकाण्ड विभाग 

आचार्यश्री ब्रजेश पाठक

ज्योतिषीय एवं प्रकाशन विभाग 

[ ख्यातिलब्ध खगोलविद्, ज्योतिषज्ञ, समाजशास्त्री, कवि एवं व्याख्याता हैं ]

श्री पंकज दुबे

प्रवक्ता एवं तकनीक प्रभारी  

हमारे भागीदारों के विषय में जानें

हमें यह बताते हुए प्रसन्नता हो रही है कि हमने अपनी नयी ऑनलाइन समाचार सेवा धर्मसंसद का उद्घाटन हाल में ही किया है | संभवतः आपको पता नहीं होगा, लेकिन अधिकांश मीडिया ख़बरें बनायीं जाती हैं तथा उनके प्रसारण एवं प्रारूप में किसी पूंजीपति, माफिया या राजनेता का व्यापक हस्तक्षेप भी सम्मिलित रहता है |

अतः हमने आपके लिए सत्य एवं निष्पक्ष समाचार सेवा की योजना बनाई है जिसे प्रभावी एवं अद्यतित करने के लिए हमारा दल निरंतर प्रयासरत है | हम बिना किसी पूर्वाग्रह या भय के, देशहित में सामाजिक, राजनैतिक एवं धार्मिक मुद्दों की सूचनाएँ आप तक पहुंचाते हैं जिससे आप देश की वास्तविक स्थिति से अवगत होते रहें |


 

यह भी महत्वपूर्ण है

हमारे महानिदेशक एवं संस्थापक महामहिम श्रीभागवतानंद गुरु जी का यह आधिकारिक संजाल क्षेत्र है | यहाँ आप उनके बहुमूल्य लेख, गतिविधि एवं मार्गदर्शन से लाभान्वित हो सकते हैं | यदि आपके मन में सनातन धर्म से सम्बंधित कोई भी जिज्ञासा हो या किसी विषम परिस्थिति में मार्गदर्शन की आवश्यकता हो तो आपको अविलम्ब हमसे सम्पर्क करना चाहिए | विश्वास करें कि आपका समर्पण एवं धर्मनिष्ठा ही आपका समाधान है |


 


विश्व की प्राचीनतम एवं व्यवस्थित सभ्यता के सदस्य होने के कारण हम संस्कृति तथा मानव मूल्यों को गहराई से समझते हैं | आपके सहयोग से हम प्रयास करते हैं उन वैज्ञानिक परम्पराओं तथा मान्यताओं को संरक्षित करने का, जिनके कारण भारत विश्वगुरु था |,,,

हमारे मार्गदर्शक


आपके साथ हम कटिबद्ध हैं, पर्यावरण की रक्षा एवं विकास के लिए | अपने पूर्वजों के द्वारा संरक्षित इस पृथ्वी को हम आपके सहयोग से एक और भी उन्नत जीवनधारी ग्रह के रूप में विकसित करने हेतु कटिबद्ध तथा प्रयासरत हैं | हमें इस बात की प्रसन्नता है कि आप जैसे लोग हमें सहयोग करते हैं ...


भय, हिंसा, उन्माद एवं स्वार्थ के इस अन्धकाल में हम मानव जाति के समक्ष एक विशुद्ध सनातनी विचारधारा का प्रसार एवं पुनर्स्थापन करके यह सुनिश्चित करने के लिए कटिबद्ध हैं कि मानवीय सभ्यता त्याग एवं परोपकार को अपनाकर सर्वहितप्रद सिद्ध हो सके ...

हमारे सहयोगी

हम इस बात पर विश्वास करते हैं कि दया और परोपकार के साथ साथ आवश्यकता है अधर्म और पाप के विनाश की | अतः हम धर्म की रक्षा और अन्याय का विनाश करने के हर प्राकृतिक और न्यायसंगत तरीके का समर्थन एवं संवर्धन करते हैं ...हमारा मुख्य उद्देश्य है विश्व का ध्यान आकृष्ट करना, उस सनातनी व्यवस्था की ओर जिसे हमारे महान पूर्वजों ने ईश्वर की कृपा और ऋषियों की त्यागपूर्ण तपस्या के फलस्वरूप चार वर्ण तथा आश्रम में विभाजित करके हमें एक व्यवस्थित तथा गौरवपूर्ण समाज का अभिन्न अंग बनाकर ज्ञान तथा विज्ञान से लाभान्वित किया...

हमारे साथ अधिक सक्रिय रहें

हम आपके जीवन में ज्ञान और मानवता के महत्त्व को समझते हैं, अतः हमारे दल के अनुभवी एवं विद्वान् सदस्य सदैव आपकी सहायता के लिए तत्पर रहते हैं | आमतौर पर कार्यभार से हमारी व्यस्तता बढ़ जाती है लेकिन इससे आपको चिंतित होने की आवश्यकता नहीं क्योंकि ऐसी स्थिति में हम स्वयं आपसे शीघ्र ही संपर्क करने का प्रयास करते हैं | हो सकता है कि हमें आपसे संपर्क करने में कुछ विलम्ब हो जाए लेकिन आपका धैर्य ही आपकी उर्जा है, अतः निराश न हों |

हमें ईश्वर पर विश्वास है क्योंकि उन्होंने हम पर विश्वास किया है : महामहिम श्रीभागवतानंद गुरु

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