हमारे उत्पादों को खरीदने के लिए (जैसे कि कुंडली, रत्न एवं पुस्तकें) आपको किसी विशिष्ट योग्यता पर आश्रित नहीं होना पड़ता है | हाँ, हम इतना अवश्य ही सुनिश्चित करते हैं कि हमारे ग्राहक सनातन धर्म का पालन करने वाले हों तथा उनके हृदय में अपने धर्म के सिद्धांतों का संरक्षण एवं संवर्धन करने की भावना हो | परन्तु यदि आप हमसे ज्ञानकाण्ड या कर्मकाण्ड संबंधी सुविधाओं की इच्छा रखते हैं तो कृपया अपने आपको निम्न मापदंडों के अनुसार जांच लें | आम तौर पर लोग हमारी सेवा की शर्तों की उपेक्षा करके अनुरोध भेजते रहते हैं परन्तु हम अपने सिद्धांतों के साथ समझौता नहीं करते | हम निम्न व्यक्तियों को अपनी ज्ञानकाण्ड एवं कर्मकाण्ड की सुविधाएँ नहीं देते :-


यदि आप मांसाहारी हैं …

हम इस बात पर कठोरता से विश्वास करते हैं कि मनुष्य तब तक ही मनुष्य है, जब तक उनके अन्दर मनुष्यत्व है | हमें नहीं लगता कि प्रकृति की सुन्दरता और विविधता के मध्य केवल अपनी जीभ के क्षणिक संतुष्टि के लिए किसी निरपराध एवं मूक प्राणी की निर्ममता से हत्या करके उसके चमड़े को चबा लेने में कहीं से भी मनुष्यता दिखती है | हम मांसाहार के हर प्रारूप का विरोध करते हैं तथा उस प्रत्येक कथित धार्मिक परम्परा, उद्योग एवं जीवनशैली का बहिष्कार करते हैं जिसके कारण किसी निरपराध की हत्या हो | धर्म एवं विज्ञान, दोनों ही यह प्रमाणित करते हैं कि मांसाहार स्वास्थ्य एवं आध्यात्मिक उन्नति के लिए अत्यंत हानिकारक है |


यदि आप मद्यपान करते हैं …

आधुनिक समाज में भले ही भौतिकवादी मनुष्य कुतर्क करके मद्यपान का प्रचार कर रहे हैं परन्तु हमारा सदैव यही मानना है कि मद्यपान मनुष्य को अतिशीघ्र एक नरपिशाच में बदल देता है जिसके द्वारा हमेशा असामाजिक कार्य ही संभव हैं | मद्यपान करनेवाले व्यक्ति को शास्त्रों में महापातकी की संज्ञा दी गयी है तथा घोरतम प्रायश्चित का विधान निर्धारित किया गया है | उसे देवपूजन, पितृ श्राद्ध एवं यहाँ तक कि देवालयों में प्रवेश की अनुमति भी नहीं दी गयी है | मद्यपान करने वाले को धर्मनिष्ठ समाज में अत्यंत निम्न दृष्टि से देखा जाता है तथा उसका कल्याण अत्यंत ही कठिन बताया गया है |


यदि आप जुआ खेलते हैं …

यदि आप सामाजिक बुराईयों जैसे कि जुआ आदि में लिप्त हैं तो हम आपको ज्ञानकाण्ड एवं कर्मकाण्ड की सुविधाएँ प्रदान नहीं करते | हम मानते हैं कि जुए का व्यसन मनुष्य को अविवेकी एवं स्वार्थी बना देता है जो उसके सर्वस्व नाश के परिणाम का कारण बनता है | हमारे सामाजिक-धार्मिक इतिहास में ऐसे सैकड़ों उदाहरण प्राप्त होते हैं जहाँ जुए ने बसे बसाये परिवारों को उजाड़ दिया |


यदि आपके माता-पिता वृद्धाश्रम में हैं …

आज के कथित विकासवादी समाज की यह कैसी विडम्बना है कि माता-पिता अकेले ही अपनी चार पांच संतानों का लालन पालन कर लेते हैं परन्तु समय आने पर चार पांच संतानें मिलकर भी अकेले माता-पिता की सेवा नहीं कर पातीं | भारतीय संस्कृति एवं धर्म में माता पिता को ईश्वरतुल्य स्थान दिया जाता है क्योंकि प्राण ईश्वर ने दिए लेकिन शरीर माता पिता ने दिया है | वाणी तो ईश्वर ने दी, परन्तु उसके उपयोग की विधि माता पिता ने सिखाई | एक प्राचीन कहावत है कि ईश्वर हर जगह हर व्यक्ति के लिए नहीं आ सकते इसीलिए उन्होंने माता पिता को बनाया | हमें हर उस व्यक्ति से घृणा है जो स्वयं तो समस्त सुख सुविधाओं का उपभोग कर रहा है परन्तु जिसके वृद्ध एवं असहाय माता पिता वृद्धाश्रम में निर्वासन झेलते हुए अपनी संतान की एक झलक पाने के लिए तरस रहे हैं |


यदि आप अन्धविश्वासी हैं …

आधुनिक समाज में मनुष्य हर प्रकार के सुखप्रदाता संसाधनों से युक्त होने के बाद भी अशांत एवं उद्विग्न है | प्रारम्भ से ही मन की अशांति ने मनुष्य का ध्यान अध्यात्म की ओर आकर्षित किया है | परन्तु आज के स्वार्थपूर्ण समाज में अध्यात्म के व्यापारियों की बाढ़ आ गयी है | सत्य एवं असत्य के बीच की दीवार धुंधली होती जा रही है तथा खुद को ईश्वर बताने वाले स्वयंभू धर्मगुरुओं ने पाखंड का व्यापक मायाजाल फैला रखा है | दुर्भाग्य की बात है कि इसमें फंसने वाले लोगों को इसका बोध ही नहीं है कि जिसे वे धर्म एवं सत्य का मार्ग समझकर धन एवं समय नष्ट किये जा रहे हैं, वह वास्तव में अधर्म एवं असत्य ही है |

वेद, उपनिषद्, पुराण, दर्शन, शास्त्र (व्याकरण, ज्योतिष, गृह्यसूत्र आदि), तंत्र, स्मृति, आचारपरक निर्णय ग्रन्थ, संहिताएँ एवं ऐतिहासिक महाकाव्य प्रारम्भ से ही सनातनी विचारधारा का प्रसारण करने वाले आधारस्तम्भ रहे हैं | कालान्तर में भ्रमित बुद्धि वाले अर्वाचीन सम्प्रदाय प्रवर्तकों ने इनकी मनमानी व्याख्या करके या इनका (सम्पूर्ण रूप से या इनमें से किसी एक का) प्रायोजित विरोध करके अपनी अपनी दुकानें खोल लीं | आज ऐसे सम्प्रदाय एवं इनके अनुयायी बहुत ही अधिक संख्या में हैं जो भौतिकवाद की संतुष्टि एवं भ्रामक चमत्कारों के पीछे अंधे होकर विनाश की ओर अग्रसर हैं |

हम हिन्दू धर्म के दशनामी मठ, शंकराचार्य, रामानुज, निम्बार्क, कौल, मध्व, रामानन्द, राधावल्लभ, गौडीय, शाक्त, शैव, गाणपत्य, सौर आदि परम्पराओं के समर्थक एवं अनुयायियों का सहर्ष स्वागत करते हैं | परन्तु यदि आप निम्न में से किसी पाखण्डपूर्ण संप्रदाय के समर्थक या अनुयायी हैं तो कृपया हमें सम्पर्क न करें |

  1. आर्य समाज
  2. रामपाल का स्वघोषित कबीरपंथ
  3. गुरमीत राम रहीम का डेरा
  4. गायत्री परिवार
  5. शिर्डी चाँद मियां उर्फ़ साईं बाबा
  6. प्रजापिता ब्रह्माकुमारी
  7. कथित शिवगुरु परिवार
  8. लिंगायत सम्प्रदाय
  9. विहंगम योग
  10. जय गुरुदेव सम्प्रदाय या आनन्द मार्ग
  11. सतनामी संप्रदाय
  12. निरंकारी मिशन
  13.  स्वामीनारायण सम्प्रदाय

इसके अतिरिक्त निर्मल बाबा, निर्मला माता, आनन्दमयी माता, राधे मां, आसाराम बापू, आशुतोष महाराज, सारथी बाबा, ओम स्वामी, प्रमोद कृष्णन, रविशंकर, चक्रपाणि, दाती महाराज, या किसी असनातनी दरगाह के अनुयायी का भी हम बहिष्कार करते हैं | हो सकता है कि प्रारम्भ में आपको इन सम्प्रदायों में कोई बुराई न लगे और इनकी विचारधारा धर्मसम्मत लगे परन्तु यदि आप वास्तव में सत्यबोध के इच्छुक होंगे तो धीरे धीरे हम इनके सम्पूर्ण मायाजाल का रहस्य आपके सामने रख देंगे |


यदि आपने कभी गर्भपात किया या कराया है …

बेशक आपको यह लगता हो कि गर्भपात कोई अपराध नहीं, परन्तु हम हर उस व्यक्ति के प्रति असहिष्णु हैं जो इतना अधिक सम्वेदनाविहीन है कि गर्भ (जो कि किसी भी प्राणी के लिए विश्व में सबसे सुरक्षित स्ठान है) में स्थित अजन्मे शिशु को भी मार डाले | हो सकता है कि आपको यह भी लगता हो कि तीन महीने तक के गर्भ को नष्ट करने में कोई समस्या नहीं, परन्तु हमें आपकी व्यक्तिगत धारणा की बजाय धर्म की परवाह अधिक है | धर्म तो दस दिन के गर्भ को भी जीवन का अधिकार प्रदान करता है | हमारे मत में सहवास मात्र संतान की उत्पत्ति एवं वंश वृद्धि के लिए ही करना चाहिए | इसके अतिरिक्त सदैव संयमपूर्वक जीवन व्यतीत करना चाहिए | आपके असंयम का परिणाम आपकी ही संतान यदि गर्भ में अपनी मृत्यु के रूप में भोगे तो मनुष्य एवं पिशाचों में क्या अंतर रह जायेगा ? केवल यौन तृप्ति के लिए सहवास करना एवं अजन्मे शिशु की हत्या हमारे लिए एक गंभीर तथा अक्षम्य अपराध है |

**यदि अति गंभीर स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्या के कारण अनिच्छा से गर्भपात कराया हो तो उसका विधिपूर्वक प्रायश्चित्त करवाने के बाद या करवाने के लिए आप हमें सम्पर्क कर सकते हैं |


यदि आपने अंतर्जातीय विवाह या व्यभिचार किया है …

सनातन धर्म के कठोर सिद्धांतों को यथावत मानने के कारण हम जन्म आधारित जाति एवं वर्ण व्यवस्था के समर्थक हैं | हम यह भी मानते हैं कि हर एक वर्ण का आधार पूर्वकृत कर्म एवं वर्तमान जन्म है | ऐसे ही अगले जन्म के वर्ण का आधार वर्तमान कर्म एवं आगामी जन्म पर आधारित है | यदि कोई व्यक्ति वर्णमर्यादा से बाहर जाकर वैवाहिक संबंधों का पालन करता है तो उसे वर्णभ्रष्ट कहा जाता है एवं उसकी संतान वर्णसंकर होती है जो घोर अनिष्टकारी है | हम अंतर्जातीय विवाह करने वाले तथा उसकी वर्णसंकर संतानों के प्रति ज्ञानकाण्ड एवं कर्मकाण्ड की सेवाएँ प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध नहीं हैं |

यदि आपने अपने धर्मसम्मत वैवाहिक मर्यादा से बाहर जाकर किसी अन्य स्त्री या पुरुष से शारीरिक सम्बन्ध बनाया है, या यदि आपने वेश्यावृत्ति में किसी भी प्रकार की सहभागिता निभाई है तो कृपया हमसे संपर्क न करें | हम ‘एक वर्ण, एक जाति, एक व्यक्ति, एक साथी’ के सिद्धांतों का कठोरता से अवलंबन करते हैं | व्यभिचार एक सामाजिक अव्यवस्था तथा पशुता का प्रतीक है जिसका धर्मनिष्ठ समाज में कोई स्थान नहीं |


यदि आप नारी/ पुरुष का अपमान करते हैं …

जब हम बात करते हैं नारी या पुरुष के अपमान की, तो यहाँ नारी एवं पुरुष के एक दूसरे के सापेक्ष विचार एवं व्यवहार का संकेत है | यदि आपके व्यवहार से आपके पुरुष संबंधी (जैसे कि पति, भाई, पुत्र, पिता या इनके समकक्ष) अप्रसन्न या पीड़ित होते हैं तो यह आपके नारीत्व पर कलंक है | उसी प्रकार यदि आपके व्यवहार से आपके नारी संबंधी (जैसे कि पत्नी, बहन, पुत्री, माता या इनके समकक्ष) अप्रसन्न या पीड़ित होते हैं तो यह आपके पौरुष पर कलंक है |

यदि आपने कभी किसी स्त्री/पुरुष का बलात्कार या यौन शोषण किया है, या एसिड आदि से क्षतिग्रस्त किया है (भले ही इसके विषय में किसी को ज्ञात नहीं) तो कृपया ईमानदारी से हमसे संपर्क समाप्त कर दें | यदि आपने अपनी स्वार्थसिद्धि के लिए कोई अनैतिक कृत्य किया है (जैसे कि ससुराल पक्ष को झूठे दहेज़ मामलों में फंसाना या दहेज़ के लिए बहू को मार देना आदि) तो हमसे संपर्क न करें |


यदि आप बाल मजदूरी के पोषण में लिप्त हैं …

यदि आप छोटे बच्चों से कठोर परिश्रम करवाते हैं, उनके चेहरे पर यदि आपके कारण भय या उदासी का भाव आता है तो आपके लिए हमारे पास कोई स्थान नहीं है | यदि आप अपने घर में बाल नौकर रखे हैं एवं उनकी शिक्षा, स्वास्थ्य या बालोपयोगी इच्छाओं का सम्मान एवं संरक्षण नहीं करते तथा उन्हें प्रताड़ित करते हैं तो हम आपको किसी भी प्रकार की सुविधा प्रदान नहीं करते | मनुष्यत्व, दया, परोपकार, क्षमा एवं उदारता जैसे सद्गुणों को ही हम प्रधानता देते हैं | आपके बल, धन, पद या परिचयों का स्थान हमारे लिए नगण्य है |


यदि आपके पास इनमें से किसी भी प्रकार की अयोग्यता है लेकिन आपका हृदय वास्तव में अपराधबोध से ग्रस्त है एवं आप उसका प्रायश्चित्त करना चाहते हैं तो आपका स्वागत है | हमें पापी से नहीं, उसके पाप से शत्रुता है | उचित मार्गदर्शन के लिए हमसे सम्पर्क करें |